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Asst. Professor

Blog image DR. RAJESH KUMAR SINGH Shared publicly - May 3 2021 4:55PM

MA SEMESTER 1 CONTRIBUTION OF CHINESE CIVILIZATION


चीनी सभ्यता की प्रमुख उपलब्धियों का उल्लेख कीजिये ।
 
Describe the achievements of Chinee civilization.
 
वास्तुकला
 
(Architecture)
 
जब प्राचीन काल में चीन में स्थायी सरकार स्थापित हो गयी तो बड़े-बड़े
 
नगरों में महल तथा पैगोडा (बौद्ध मन्दिर) बनाये गये । इस प्रकार के भव दक्षिण पूर्वी एशिया के अनेक देशों में आज भी देखे जा सकते हैं। चीन की बड़ी दीवार जिसका बनना (चिन्ह) राजवंश के समय में प्रारम्भ हुआ था, प्राचीन चीन के निर्माण कौशल का अच्छा उदाहरण है। इसका उद्देश्य उन हूणों को रोकना था जो उत्तर से आकर चीन पर आक्रमण करते थे। यह दीवार पूर्वी तट से उत्तर चीन तक फैली हुई है। इसकी लम्बाई 2400 किलोमीटर है। यह पश्चिमी चीन के पहाड़ों तक अनेक पहाड़ियों और घाटियों में बनाई गई थी। यह पत्थर और मिट्टी की बनी है और इसकी ऊँचाई 6 मीटर है। यह दीवार इतनी चौड़ी है कि इसके ऊपर गाड़ी चल सकती है। हर सौ दो सौ मीटरों के पश्चात् इस दीवार मेंपोद्धाओं के लिये मीनारें बनाई गई थीं, जहाँ से वह पहरा दे सके। इतनी बड़ी और मजबूत दीवार को बनाने में अनेक दशक वर्ष लगे होंगे और इसे पूरा करने का कार्य हजारों मजदूरों ने किया होगा ।
 
चित्रकला
 
(Painting) )
 
चीन में चित्रकला सुलेख का भाग समझी जाती थी। जिस कूंची से लिखा जाता था वही चित्र बनाने के काम में लाई जाती थी। इस कला को चीन में विशेष प्रोत्साहन मिला । चीनी चित्रों में विविधता है। अनेक चित्र कुण्डली के रूप में थे, जिन्हें लपेट कर सुरक्षित रखा जा सके। इन चित्रों में इस बात पर बल दिया जाता था कि चित्र के माध्यम से देखते ही व्यक्ति विशेष की भाव दशा संप्रेषित हो जाये । इसलिये वस्तुओं को ज्यों का त्यों चित्रित करने के लिये यहाँ की चित्रकला में स्थान ही न था । यह कहना उचित होगा कि चीनी चित्र वर्णन नहीं करते, वे केवल उसकी ओर संकेत करते हैं। यद्यपि वे सौन्दर्य की अभिव्यक्ति पर बल देते थे।
 
भाषा और साहित्य
 
(Language and Literature )
 
चाऊ शासकों ने चीनी लिपि का मानवीकरण किया। सरकार ने इस समय 3300 चिन्ह स्वीकार किये । जब चीन का राजनीतिक संगठन हो गया तो देश के प्रत्येक भाग में इस लिपि को काम में लाया गया। शताब्दियाँ बीतने पर इसमें अनेक नये चिन्ह सम्मिलित कर लिये गये और अधिक कलात्मक बना दी गई, किन्तु इसके रूप में विशेष अन्तर न हुआ। लिपि तो समस्त देश में एक सी ही थी किन्तु बोलियों में विशेष रूप से उत्तरी और दक्षिणी चीन में बहुत अन्तर था। चीन की लिपि ने देश की सांस्कृतिक एकता स्थापित करने में महत्वपूर्ण भाग लिया। चीनी लिपि और भाषा कुछ अन्य देशों में भी फैली। जापान, कोरिया और वियतनाम की लिपियाँ और भाषायें चीन की लिपि और भाषा पर आधारित हैं ।
 
अत्यन्त प्राचीन काल में चीन के निवासी हड्डियों पर लिखते थे उसके पश्चात् वे बाँस की पट्टियों पर लिखने लगे लिखने के लिये सरकंडे की कलम का प्रयोग किया जाता था। तत्पश्चात् उन्होंने रेशमी कपड़े पर ऊंट के बालों की कूंची से लिखना प्रारम्भ किया। कूंची के प्रयोग के कारण ही उनका लेख इतना कलात्मक बन सका। पहली शती ईसवी में कागज का आविष्कार हुआ और इससे लेखन कला में क्रान्तिकारी परिवर्तन हुआ। पेड़ों की छाल बांस और चिथड़ों से कागज बनाया जाता था। लिखने के लिये रेशम से कागज कहीं सस्ता था, अतः कागज के आविष्कार के कारण अधिक व्यक्ति लिखना सीख सके और ज्ञान प्राप्त कर सके । इसके कारण सुलेख कला का भी विकास सम्भव हो सका। कागज काआविष्कार चीन और दूसरे देशों में ज्ञान के प्रसार में विशेष महत्व रखता है। यह विश्व को चीन की महान देन है।
 
चीनी लिपि तथा भाषा के विकास और कागज के आविष्कार होने पर चीन में उच्च कोटि के साहित्य की रचना हुई और उसे भविष्य के लिये सुरक्षित रखना सम्भव हो गया। प्राचीन साहित्य के अतिरिक्त चीनी दार्शनिकों ने जन साधारण की भाषा में, गद्य में अपने विचार व्यक्त किये। चाऊ शासकों ने कवियों को संरक्षण दिया। उनके काल की कविताओं का सुन्दर उदाहरण छोटे गीतों का संग्रह' है। बाद में सुन्दर शोक गीत लिखे गये। हान राजाओं के समय में पद लालित्य से अलंकृत कविता का प्रचलन हुआ और इसमें उपवनों और प्रसादों के सुन्दर वर्णन मिलते हैं ।
 
इतिहास लिखने की प्रथा भी विश्व में सबसे पहले शायद चीन में ही प्रारम्भ हुई। कहा जाता है कि कनफ्यूशियस ने इतिवृत्त लिखे। इसमें 'लू' राज्य का 722 से 481 ई० पू० तक का इतिहास है। बाद में इतिहास लिखने की कला का अधिक विकास हुआ। ऐतिहासिक ग्रन्थों में कुछ ऐतिहासिक नाटक और उपन्यास लिखे गये प्रत्येक राजवंश का अलग इतिहास लिखा गया। राजवंशों का इतिहास लिखने की परम्परा इतनी अधिक बलवती हो गई कि इस समय 26 राजवंशों का इतिहास उपलब्ध हैं। इनमें चीन का 1912 ई० तक का इतिहास विद्यमान है। इस प्रकार का सबसे पहला इतिहास 'स्ख-मा-ध्येन' ने लिखा था। वह सम्भवतः पहली या दूसरी शती के ई० पू० विद्यमान था। उसका आज तक चीन के प्रथम इतिहासकार के रूप में आदर किया जाता है। इन इतिहासों में राजदरबारों के जीवन की झलक, सम्राटों की वंशावलियों, उनके अधिकारियों की रुचियाँ, महान पुरुषों की जीवन कथायें और विभिन्न विषयों जैसे शासन पद्धति, भूगोल, ज्योतिष और संगीत के विषय में हमें बहुत ज्ञान प्राप्त होता है ।
 
हान वंश के राज्य काल के मध्य में कविता की एक नई शैली का विकास हुआ। इसमें कविता को एक संगीत के रूप में गाया जाता था। इस प्रकार की कविता को लोक साहित्य से बहुत प्रेरणा मिली। इस काल में रहस्यवादी कविता भी लिखी गई। इसका मुख्य विषय 'सुरा' होता था। जब बौद्ध ग्रन्थों का अनुवाद किया गया तो गद्य की नई शैली का विकास हुआ। इस शैली का आधार बोल-चाल की भाषा थी । परन्तु अन्य गद्य साहित्य में शब्द लालित्य पर बल दिया जाता था, भावों की अभिव्यक्ति पर नहीं। इस भाषा के पंडित ही लिखते थे और वे ही समझ सकते थे ।
 
विज्ञान और टेक्नोलोजी (Science and Technology) )
 
इंजीनियरिंग के क्षेत्र में चीनियों की सबसे बड़ी उपलब्धि नहीं बनानाथा। इनमें कई तो सौ मील से भी अधिक लम्बी थीं। इनमें नावें चलती थीं और इनके पानी से सिंचाई भी जाती थी । चीनियों की विज्ञान के
 
क्षेत्र में अनेक देन हैं। उन्होंने तारों और नक्षत्रों के समूहों की सूचियाँ बनाई। वे ज्योतिष के द्वारा ग्रहण जैसी अनेक घट नाओं का समय का निर्धारित कर सकते थे। वे ग्रहणों का कारण जानते थे और उनके विषय में भविष्यवाणी कर सकते थे। बहुत से चीनी ज्योतिष जानते थे कि सूर्य, चन्द्रमा और सभी तारे आकाश में स्वतन्त्र रूप से चलते रहते हैं। चीनियों ने जलघड़ी का भी आविष्कार किया। बाढ़ों की समस्या के कारण चीनियों ने वर्षा, बादलों और ऋतुओं के विषय में अपना ज्ञान बढ़ाने का प्रयत्न किया । वर्षा, सूखा और बाढ़ों का ठीक प्रकार से लेखा रखा गया। इस प्रकार चीन में मौसम विज्ञान का प्रारम्भ हुआ ।
 
गणित में चीनी लोग दशमलव


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Comments (1)
user image PUNAM KUMARI Shared publicly - 22-06-2021 06:58:38

2/08/2002