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Asst. Professor

Blog image DR. RAJESH KUMAR SINGH Shared publicly - May 2 2021 5:25PM

BA PART 3 SEMESTER 5 WOODROW WILSON


वूड्रो विल्सन 1912 ई० के निर्वाचन में लोकतंत्रवादियों ने राष्ट्रपति पद के लिए वूडो विल्सन को अपना उम्मीदवार मनोनीत किया। वह दक्षिणी प्रेसवेटेरियन धर्मोपदेशक का पुत्र था। वह बचपन से राजनीतिज्ञ नेता बनना चाहता था। उसने अटलांटा में वकालत शुरू की। पी० एच० डी० की उपाधि प्राप्त करने के बाद वह राजनीति अर्थशास्त्र का प्राध्यापक और प्रिंसटन (Princeton) विश्वविद्यालय का अध्यक्ष भी बना। बाद में वह न्यू जर्सी का गवर्नर बनाया गया। वह काफी उत्साही और साहसी था। उसमें लोगों को प्रेरित और प्रभावित करने की प्रतिभा थी। किन्तु वह काफी सिद्धांतवादी था। वह नीतिशास्त्र पर उत्तम प्रवचन दे सकता था, किन्तु वह सभी मामलों में अपने निर्णय को सही मानता था। फलतः वह दूसरों के परामर्श की उपेक्षा करने लगा। 1912 ई० के निर्वाचन में विल्सन विजयी रहा। उसकी विजय में प्रगतिवादियों का बड़ा हाथ था। विल्सन के कार्यक्रम का मुख्य अंग 'नई स्वतंत्रता' (New Freedom) थी। इसका अर्थ छोटे-छोटे उद्योगपतियों की उन्मुक्ति थी। उसने कहा, "यि उन्मुक्त उद्यम नहीं है तो वह किसी भी मामले में स्वतंत्र नहीं है।" वह लोकतंत्रवादी अमरीका में प्रगतिवादियों का समर्थन प्राप्त करने में सफल रहा। विल्सन का मुख्य सलाहकार कर्नल एडवर्ड एम० हाउस (Colonel Edward M. House) था। वह आर्थिक और राजनीतिक मामलों में सलाह देता था। उसके मंत्रिमंडल के सदस्य कम प्रभावशाली थे। ब्रायन बी० विल्सन (William B. Wilson) श्रम सचिव बनाया गया। विल्सन के सुधार 1. सीमा शुल्क की दर में कमी-विल्सन ने सर्वप्रथम सीमा शुल्क की दर कम करने की ओर ध्यान दिया। पदग्रहण करते ही उसने कांग्रेस का एक विशेष अधिवेशन बुलाया और सीमा शुल्क का प्रश्न उठाया। उसके समर्थन पर अंडरवुड (Underwood) ने सदन में एक विधेयक पेश किया जिसमें सीमा शुल्क की दर करने के लिए कहा गया। इससे राजस्व में कमी होने की संभावना थी जिसकी पूर्ति के लिए अशांकित आयकर का प्रावधान किया गया। 4000 पौंड प्रतिवर्ष आय वाले व्यक्तियों या निगमों को एक प्रतिशत 20,000 डालर की आय वाले को दो प्रतिशत तथा 500,000 डालर की आय वाले को छह प्रतिशत आयकर देना पड़ता था। अमरीकी कर पद्धति में आयकर एक महान परिवर्तन की शुरुआत थी। सरकार संपन्न लोगों की जेब से पैसे निकालने लगी। 2. बैंक प्रणाली में सुधार - 1911 ई० में विल्सन ने कहा था, "इस देश का सबसे बड़ा एकाधिकार मुद्रा एकाधिकार है। जब तक यह कायम रहेगा, हमारा उद्यम, हमारी स्वतंत्रता आदि का कोई प्रश्न ही नहीं उठता। 1913 ई० के आरम्भ में सदन की एक अन्वेषण समिति ने चौंका देने वाली सांख्यिकी पेश की। समिति का अध्यक्ष लोकतंत्रवादी आर्सेन पूजो (Arsene Pujo) था। सांख्यिकी के अधार पर लुई डी० ब्रेडीज (Louis D. Brandeis) ने 'दूसरे लोगों के पैसे' (Other People's Money) नामक शीर्षक में अनेक निबंध लिखे। इनमें उसने बतलाया कि छोटे-छोटे बैंक बड़े-बड़े बैंकों में अपनी बचत जमा करते हैं तथा ये बड़े बैंक वालस्ट्रीट-स्थित दैत्याकार कुछ ही बड़े-बड़े बैंकों में अपनी बचत जमा करते हैं। वालस्ट्रीट के इन दैत्याकार बैंकों के पास ही पूरे देश के लोगों का पैसा है। ये बैंक ही निगमों को नियंत्रित करते हैं। बड़े-बड़े उद्योग-ग्रंथों के ये प्राण हैं। प्रसिद्ध मोर्गन राकफेलर उद्योगपतियों के 112 निगमों के 341 निदेशक इन बैंकों के 22,245,000,000 डालर की पूँजी के मालिक हैं। विल्सन इस मुद्रा एकाधिकार को तोड़ना चाहता था। इसके लिए बैंक प्रणाली में सुधार लाना आवश्यक हो गया। अमरीकी बैंक प्रणाली में मुख्यतः दो दोष थे— विकेन्द्रीयकरण और स्वतंत्रता। इनके कारण ही बैंकों का दिवाला निकल जाता था। विल्सन कांग्रेस की सहायता से बैंक प्रणाली में सुधार लाने के लिए दृढ़संकल्प था। 1913 ई० में कांग्रेस ने संघीय निधि अधिनियम (Federal Reserve Act) पारित कर दिया। इसके द्वारा बारह क्षेत्रीय बैंकों की स्थापना की गई। इनका प्रशासन संघीय निधि पार्षद (Federal Reserve Board) द्वारा होता था। संघीय निधि बैंक (Federal Reserve Bank) को 40 प्रतिशत स्वर्णमान के मूल्य पर पत्र- मुद्रा निर्गत करने का अधिकार था। संघीय निधि बैंक देश के लगभग 50 प्रतिशत बैंकों का नियंत्रण करने लगा। 1920 ई० के दशक में तो देश के 80 प्रतिशत बैंक इसके सीधे नियंत्रण में आ गए। देश के बैंक संघीय निधि पार्षद को भय की दृष्टि से नहीं, बल्कि भक्तिभाव से देखने लगे। विल्सन ने पार्षद में अनुदारवादी और हमदर्द लोगों को नियुक्त किया। इस व्यवस्था से बैंकों की कार्यप्रणाली में महत्वपूर्ण सुधार आए। 3. संघीय व्यापार आयोग की स्थापना- बड़े-बड़े व्यापारिक संघों की भी समस्या थी। 1914 ई० में न्यास विरोधी अनेक विधेयक कांग्रेस में पेश किए गए। विल्सन ने केवल एक विधेयक का समर्थन किया जो अनुचित व्यापारिक व्यवहारों को रोकने और संघीय व्यापार आयोग (Federal Trade Commission) की स्थापना से सम्बन्धित था। इसमें पाँच सदस्य थे जिनकी नियुक्ति सात वर्षों के लिए होती थी। आयोग का मुख्य काम अनुचित व्यापारिक व्यवहारों को रोकना था। इसके लिए यह निगमों की कार्यप्रणाली की जाँच करता था और तथ्यों को इकट्ठा करता था। यह किसी भी व्यक्ति या निगम को अनुचित व्यापारिक व्यवहारों से रोकने के लिए आदेश जारी कर सकता था। किन्तु, अदालतों में इन आदेशों पर पुनरीक्षण किया जा सकता था। 4. क्लेटन न्यास विरोधी अधिनियम-विल्सन ने क्लेटन न्यास-विरोधी अधिनियम (The Clayton Anti-trust Act) का समर्थन किया, लेकिन इसकी प्रभावकारिता पर सन्देह प्रकट किया। इस अधिनियम द्वारा मूल्यों पर नियंत्रण रखा गया। एक-दूसरे की पूँजी खरीदने, निदेशकों को एक न्यास व निगम छोड़कर दूसरे प्रतिद्वन्द्वी निगम व न्यास में काम करने के अधिकार आदि पर प्रतिबंध लगा दिए गए। अधिनियम में यह भी कहा गया कि श्रम कोई व्यापार की वस्तु नहीं है। मजदूर संघ और किसानों के संगठन इस अधिनियम की परिधि के बाहर थे। मजदूरों को हड़ताल करने, बहिष्कार करने या शांतिपूर्वक धरना देने के अधिकार से वंचित नहीं किया गया। अमरीकी संघीय श्रम (American Federal Labour) के अध्यक्ष गोम्पर्स (Gor ers) ने उपर्युक्त अधिनियम को मजदूरों का महान अधिकार-पत्र (Labour's Magna carta) कहा है। 5. कृषि सुधार - विल्सन ने कृषि जगत की ओर भी ध्यान दिया। 1914 ई० में स्मिथ लिवरः व कृषि विस्तार अधिनियम (The Smith Lever Agricultural Extension Act) पारित किया गया। इसके द्वारा राज्यों को कृषि विकास के लिए संघीय सरकार से आर्थिक अनुदान दिया गया। 1917 ई० के एक अधिनियम (The Smith Hughes Act) द्वारा व्यावसायिक शिक्षा पर ध्यान दिया गया। कृषि विभाग ने कृषि अनुसंधानों का विस्तार किया। 1916 ई० में संघीय कृषि ऋण अधिनियम (Federal Farm Loan Act) पारित किया गया जिसके अनुसार संघीय कृषि ऋण पार्षद (Federal Farm Loan Board) और बारह संघीय कृषि ऋण बैंकों की स्थापना की गई। इनके द्वारा किसानों को अपनी जमीन बंधक रखने पर ऋण दिया जाने लगा। वह काम सहयोगी ऋण समितियाँ (Co-operative Loan Associations) ft offi 6. श्रम-विधान- 1912 ई० के चुनाव में अमरीकी श्रमसंघ (The American Federation of Labour) ने विल्सन की बड़ी मदद की थी। विल्सन ने उनके कल्याण की ओर भी ध्यान दिया। 1915 ई० के अधिनियम (The La Follette Seamen's Act) द्वारा जहाजों में काम करने वाले मजदूरों के काम करने की दशा के निरीक्षण पर जोर दिया गया। जहाज मालिकों ने इसके विरुद्ध आवाज भी उठाई, लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। 1913 ई० के अधिनियम द्वारा एक मध्यस्थता पार्षद (Board of Mediation and couciliation) की स्थापना की गई। इसका क्षेत्राधिकार रेलवे में काम करने वाले मजदूरों के विवादों से संबंधित था। 1916 ई० में रेलवे में भाईचारे (The Railway Brotherhoods) में आठ घंटे कार्यावधि की माँग की प्रशासकीय दबाव पड़ने पर एडम्सन अधिनियम (The Adamson Act) पारित किया गया। जिसके द्वारा रेलवे मजदूरों की माँग मान ली गई। आर्थिक आधार पर इस अधिनियम की बड़ी आलोचना की गई। लेकिन 1917 ई० में उच्चतम न्यायालय ने विल्सन बनाम न्यू (Wilson V. New) में इस अधिनियम का समर्थन किया। दूसरी ओर न्यायालय ने शिशु श्रम को रोकने के लिए दो प्रयासों को विफल कर दिया। 7. प्राकृतिक साधनों का संरक्षण विल्सन ने प्राकृतिक साधनों के संरक्षण पर ध्यान दिया। उसके गृह सचिव फ्रैंकलिन के० लेन (Franklin K. Lane) ने इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया। राज्यों ने दीर्घकाल से जल-स्थलों पर अपने दावे पेश किए थे, किन्तु 1916 ई० में उच्चतम न्यायालय ने संयुक्त राज्य बनाम यूटाह पावर ऐंड लाइट कंपनी के मले में इस दावे का खंडन किया। यह निर्णय 1910 ई० संघीय जलशक्ति अधिनियम Vederal Water Power Act) पारित कराने में सहायक सिद्ध हुआ। इसके द्वारा संघीय जलशक्ति आयोग (Federal Water Power Commission) की स्थापना की गई। इसमें पुड, गृह और कृषि विभागों के सचिव थे। आयोग निजी निगमों को जलशक्ति स्थलों के उपयोग के लिए अनुज्ञा प्रदान कर सकता था। यह 50 वर्षों के लिए संविदा भी दे सकता था। 8. अन्य सुधार – विल्सन के अन्य सुधारों में ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण और भंडारगृहों की स्थापना मुख्य हैं। इसके लिए दो अधिनियम पारित किए गए। 1916 ई० में संघीय राजमार्ग अधिनियम (The Federal Highway Act) पारित किया गया। इसके द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण के लिए राज्यों को आर्थिक सहायता दी गई। 1916 ई० में भंडारगृह अधिनियम (The Warehouse Act) पारित किया गया। इसके द्वारा भंडारगृहों की स्थापना की गई जहाँ किसान खाद्य पदार्थों को रख सकते थे। ऐसा करके जनवादी आंदोलन की एक दीर्घकालीन माँग की पूर्ति की गई। 1919 ई० में कांग्रेस ने राज्यों के अनुमोदन पर महिलाओं को मताधिकार देने के लिए कानून पारित किया। 1920 ई० के चुनाव में औरतों को भी मताधिकार दिया गया।



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