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Blog image DR. RAJESH KUMAR SINGH Shared publicly - May 2 2021 5:21PM

BA PART 2 SEMESTER 3 FIROZ TUGLAK


फिरोज़ तुगलक (1351 -88 ई.) (Feroze Tughlaq 1351-88 A.D.) प्रारम्भिक जीवन (Early Life): मुहम्मद तुगलक की 20 मार्च, 1351 ई. को सिन्ध में घट्टा के स्थान पर मृत्यु हो गई। उसका अपना कोई पुत्र नहीं था। सिंहासन को खाली रखना जोखिम भरा था। इसलिये मुसलमान अमीरों और सरदारों ने मुहम्मद तुगलक के चचेरे भाई फिरोज़ तुगलक को राज्य सिंहासन पर बैठने की प्रार्थना की। उसने कुछ हिचकचाहट के पश्चात् सुल्तान बनना स्वीकार कर लिया। उस समय देश के कई भागों में विद्रोह भड़क रहे थे। गुजरात, सिन्ध, बंगाल तथा दक्षिण के प्रदेश स्वतन्त्र हो गए थे। मुहम्मद तुगलक की उल्टी सीधी योजनाओं के कारण जनता दुखी थी। दिल्ली के आस-पास का प्रदेश अकाल पड़ने से उजड़ गया था। फिरोज़ तुगलक जैसे साधारण व्यक्ति के सामने ये जटिल समस्यायें थीं। विदेश नीति (Foreign Policy): मुहम्मद तुगलक के अन्तिम दिनों में कई प्रदेश दिल्ली साम्राज्य से स्वतन्त्र हो गये थे। फिरोज़ तुगलक ने उनको पुनः प्राप्त करने का प्रयास किया परन्तु उसे इस कार्य में सफलता न मिली क्योंकि उस में एक योग्य और कुशल सेनापति के नहीं थे। गुण (1) बंगाल अभियान (Bengal Expedition): फिरोज़ तुगलक ने 1353 ई. में बंगाल पर आक्रमण किया। वहां के शासक अल्यासशाह ने अपने आप को इकदाला के किले में बन्द करके शत्रु का सामना किया। इसी दौरान वर्षा ऋतु आरम्भ हो गई। सुल्तान ने दुर्ग का घेरा उठा लिया और अल्यास शाह से सन्धि कर ली। 1359 ई. में अल्यास शाह की मृत्यु के पश्चात् उसका बेटा सुलतान सिकन्दर (3) नगर कोट (कांगड़ा) पर आक्रमण (Attack on Nagarkot or Kangra): 1361 ई. में मुल्तान ने नगरकोट कांगड़ा पर आक्रमण किया। वहां के शासक ने बिना लड़े ही पराजय स्वीकार कर ली। शाही सेना ने ज्वालामुखी और कई अन्य मन्दिरों को बुरी तरह लूटा और मूर्तियों को तोड़ फोड़ दिया। 459 (4) चट्टा अथवा सिन्ध पर आक्रमण (Attack on Thatta or Sindh): 1362 ई. में फिरोज तुगलक ने सिन्ध की राजधानी परमण कर के उसे घेरे में ले लिया। वहां के शासक जाम ने सेना का डट कर सामना किया। उसी समय इसमें और महामारी के कारण फिरोज़ तुगलक के बहुत से घोड़े मर गए। आने दिल्ली से सैनिक सहायता मंगवाई। प्रधानमन्त्री ख्वाजा जहां मकबूल द्वारा भेजी गई सेना की सहायता से फिरोज तुगलक ने सिन्ध पर अधिकार कर लिया। परन्तु इस अभियान ने मुल्तान की सैनिक अयोग्यता को प्रमाणित कर दिया। (5) फिरोज़ की दक्षिण नीति (Deccan Policy of Feroze) मुहम्मद तुगलक के शासन काल में ही दक्षिणी भारत के बहुत से प्रदेशों ने अपने आप को स्वतन्त्र घोषित कर दिया था। फिरोज तुगलक ने उन पर पुनः अधिकार करने का कोई प्रयास नहीं किया। फिरोज़ तुगलक का शासन प्रबन्ध (Feroze Tughlaq's Administration) फिरोज तुगलक एक शान्ति प्रिय शासक था। उसका शासन काल बहुत से लाभकारी सुधारों के लिये स्मरणीय है। उसके उपायों ने कृषि, व्यापार और वाणिज्य को बहुत प्रोत्साहन दिया। उसने अलाउद्दीन खिलजी और मुहम्मद तुगलक द्वारा छोटे व्यापारियों और दुकानदारों पर लगाये गये कई दुखदायी कर समाप्त कर दिये। उसके मुख्य सुधारों का विवरण इस प्रकार है: (1) कृषि को बढ़ावा (Incentives to Agriculture): भूमि सुधार और कृषि को बढ़ावा देने की अपनी योजनाओं में फिरोज तुगलक ने अपने योग्य मन्त्री खान-ए-जहां मकबूल का सहयोग प्राप्त किया। कृषि की उन्नति के लिये उसने पांच नहरे खुदवाई। उसके सार्वजनिक निर्माण कार्यों में सबसे प्रमुख यमुना नहर का निर्माण था जिसका पानी हांसी और हिसार की सूखी भूमि को सींचने के लिये करनाल से लाया गया। तत्पश्चात् इस नहर का प्रयोग अंग्रेजी सरकार ने पंजाब में भूमि के एक बड़े भाग की सिचाई करने के लिये किया। दूसरी नहर सरस्वती के पानी को मारकण्डा नदी के पानी से मिलाने के लिये खोटी गई। यह नहर 96 मोल लम्बी थी। इसका पानी सहिन्द के समीप सतलुज नदी से लिया जाता था और यह झज्जर के स्थान पर समाप्त होती थी। तीसरी नहर सिरमौर की पहाड़ियों से निकलती थी। चौथी नहर घग्घर नदी से निकल कर नये निर्मित नगर फिरोजाबाद तक पहुंचती थी और पांचवी नहर फतेहाबाद और सिरसा तक जाती थी। इन नहरों के दोनों ओर किसानों की नई बस्तियां अस्तित्व में आई। इससे भूमि के उत्पादन में सुधार हुआ और राज्य की आय में वृद्धि हुई। जिनमें सात (2) बाग लगवाना (Gardening): फिरोज़ ने दिल्ली के ईर्द-गिर्द और बहुत से दूसरे स्थानों पर बाग लगवाये प्रकार के सफेद और काले अंगूर उगाये जाते थे जिनसे सरकार को 1,50,000 रुपये वार्षिक आय होती थी। (3) दुखी लोगों की सहायता (Helping the Aggrieved): मुहम्मद तुगलक को उलटी सोधी योजनाओं के कारण लोगों को अनेक कष्ट सहन करने पड़े थे। फिरोज़ तुगलक ने ऐसे लोगों की सरकारी कोष से सहायता की उसने कई लोगों के सरकारी ऋण छोड़ दिये। कई ऐसे लोगों को जिनके पूर्वजों को मुहम्मद तुगलक ने कठोर दण्ड दिये थे, आर्थिक सहायता देकर सन्तुष्ट किया गया। (4) दण्ड विधान में सुधार (Lenient Punishments): सुल्तान ने अपराधियों के हाथ, पांव और नाक काटने जैसे निर्दयतापूर्ण दण्डों को समाप्त कर दिया। इसके अतिरिक्त उसने राज्य के महत्वपूर्ण स्थानों पर न्यायालय (दारूल अदल) स्थापित किये और न्याय करने के लिये काजी तथा मुफती नियुक्त किये। (5) जन कल्याण कार्य (Public Welfare Works): फिरोज तुगलक ने जन कल्याण के कई कार्य किये। उसने बेकारो को नौकरियां दी। उसने एक विशेष विभाग की व्यवस्था की जिसका नाम दीवान-ए-खैरात अथवा दान विभाग था जिसका पहला काम निर्धन लोगों को उनकी बेटियों की शादी के समय धन की सहायता देना था। उसने दारूलशिफा नाम से एक अस्पताल दिल्ली के निकट स्थापित किया जहां रोगियों की दवाईयों और भोजन पर सरकार की ओर से व्यय किया जाता था। दासों की दशा सुधारने और उन्हें भिन्न-भिन्न प्रकार के उद्योग धन्धों और दस्तकारी शिक्षा देने के लिये एक अलग विभाग खोला गया। (6) निर्माण कार्य (Construction Works): फिरोज़ ने दिल्ली के पास एक नए नगर की स्थापना की जिसका नाम फिरोजाबाद रखा गया। नगर की प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिये सुल्तान ने अशोक के समय के दो स्तम्भों को मेरठ और तोपरा (ज़िला अम्बाला) से उखाड़ कर दिल्ली के समीप गढ़वा दिया। सुल्तान द्वारा स्थापित किये गए अन्य नगर मुहम्मदपुर, जफ़राबाद, जौनपुर, हिसार फ़िरोज़ा, फिरोज़ाबाद और फतेहबाद थे। इतिहासकार फरिश्ता के अनुसार, सुल्तान ने अपने राज्य में 40 मस्जिदों, 30 मदरसों, 20 महलों, 100 सरायों, 100 स्नानघरों, 10 स्तम्भों तथा 50 पुलों का निर्माण करवाया। (7) शिक्षा को प्रोत्साहन (Encouragement to Education): सुल्तान स्वयं बड़ा विद्वान था और विद्वानों को संरक्षण देता था। उसने कई नए मदरसे (स्कूल) स्थापित किये। अध्यापकों को अच्छे वेतन दिये जाते थे और विद्यार्थियों की भी सहायता की जाती थी। वह इतिहास में बहुत रुचि रखता था। उसने बर्नी और अफीफ़ जैसे इतिहासकारों को अपने दरबार में रखा हुआ था। अफीफ़ के अनुसार, सुल्तान ने विद्वानों तथा कुरान का अध्ययन करने वालों पर 36 लाख टंके व्यय किये। (8) मुद्रा प्रणाली में सुधार (Reforms of Currancy): फिरोज़ तुगलक ने तांबे और चांदी को मिला कर तैयार करवाये। निर्धनों की सुविधा के लिये छोटे सिक्के भी प्रचलित किये गए। (9) योग्य व्यक्तियों की नियुक्ति (Appointment of Efficient Personnel's): अपने एनन् को कुशलतापूर्वक चलाने के लिये फिरोज़ तुगलक ने योग्य व्यक्तियों को सरकारी पदों पर नियुक्त किया।



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