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Asst. Professor

Blog image DR. RAJESH KUMAR SINGH Shared publicly - May 5 2021 5:31PM

MA SEMESTER 1 DOWNFALL OF ASYRIAN EMPIRE


इत दुःखद अंत की बहानी अशु-वनिपास की मृत्यु से ही प्रारंभ होती है । उसकी मृत्यु के शोध बाद बेबिलोन में विद्रोह हुआ । चालिया के राजा नबोपोला सर ने आक्रमण कर दिया। पूरब से मोड प्रदेश की जातियों के नेता सयाजरेग (Cyaxares) ने भी धावा बोल दिया। इन लोगों को सीथियम यानी शक दक्षिण ईरान की इंडो-यूरोपियन तथा पशियन जातियों से सहायता मिली। पनियन जातियों ने एलम पर चढ़ाई कर दी। ११२ ई० पू० में नबोपोलासर साबाजरेस तथा सीथियनों की गम्मिलित सेना ने राजधान नेवे पर अधिकार कर लिया। यह सुन्दर और शानदार राजधानी पूर्णरूपेण मिट्टी में मिला दी गई। निवासियों के साथ-साथ महलों, मंदिरों, उपवनों, पुस्तकालबों और बगीचों को इस प्रकार नष्ट किया गया कि उनका नामोनिशान तक नहीं रहा । इस प्रकार के सुनियोजित विनाश के उदाहरण इतिहास में कम पाए जाते हैं। असीरियाई सभ्यता और जाति को नेस्तनाबूद कर दिया गया। असीरियाई साम्राज्य के साथ-साथ असीरियाई जाति का भी नामोनिशान मिट-सा गया । निनेवे के विनाश के पहले कुछ असीरियाई सैनिक यहाँ से भाग निकले थे । इन लोगों ने सीरिया प्रदेश के नगर हानि (Harran) के किले में शरण ली। इस किले से ही असीरियाई शासक सीरिया पर अपना प्रभुत्व जमाए रखने में समर्थ हुए थे। इस स्थान से बचे-खचे बसीरियाई सैनिकों ने असीरियाई साम्राज्य को यही स्थापित करने की कोशिश की । ६१० ई०-पू में इस किले पर भी असोरिया के शत्रुओं का आक्रमण हुआ। यद्यपि यहाँ बसीरियाई सैनिकों की सहायता के लिए मित्र के शासक नेको द्वितीय की सेना आ पहुंची तथापि नवोपोलासर के वीर नेबुचडरेज्जर के नेतृत्व में ६०५ ई० पू० में मिस्र तथा असीरिया की सम्मिलित सेना को निर्णायक ढंग से पराजित किया गया। इस पराजय के पश्चात् असीरियाई जाति के बचे-खुचे लोग सोरिया में बस गए तथा क्रमश सीरिया को जातियों में विलीन हो गए । बसीरियाई साम्राज्य के विनाश के साथ-साथ असीरियाई जाति का विनाश एवं लोप भी प्राचीन विश्व के इतिहास की एक विचित घटना है। पर, हुबा ऐस ही बसीरिवाई जाति के कुछ दरिद्र लोग जहां-तहां इस्लाम के उद थे, परंतु ऐसे लोगों के रहने से असीरियाई जाति का अस्तित्व नहीं सिद्ध होता है। ऐतिहासिक दृष्टि से ६०५ ई० पू० में ही इस जाति का अस्तित्व समाप्त हो गया । इस संपूर्ण विनाश का कारण हम उनके साम्राज्य की अंतर्निहित में पा सकते हैं। हम देख चुके हैं कि कई पीढ़ियों के लगातार युद्धों से क्रमशः उनके यहाँ सैनिकों की संख्या तथा जनशक्ति कम होती गई। अतः अंत में उनके अपने साम्राज्य के शत्रुओं के मुकाबले में ये भाई के सिपाही कब तक टिक सकते थे ? विजित प्रदेशो की जनता के प्रति उनका क्रूर एवं अमानुषिक व्यवहार उनके विनाश का प्रधान कारण बन गया। उनके साम्राज्य की प्रजा उन्हें अत्यंत घृणा को दृष्टि से देखती एवं मौका मिलते ही विद्रोह करने तथा प्रतिशोध के लिए तैयार रहती थी। उनका देश चारों ओर से भयानक शत्रुओं से घिरा हुआ था। उत्तर और पूरब में बसने वाली सीथियन, सिमेरियन, चाल्डिमन तथा मीड जातियाँ असीरियन साम्राज्य की समृद्धि से जलती थी और उस पर टूट पड़ने के लिए अवसर दूढ़ रही थीं। अतः, अशुर-बनिपाल की मृत्यु के बाद ही असीरिया साम्राज्य को कमजोर पाकर इन लोगों ने इसका विनाश कर दिया। पर, जिस सुनियोजित ढंग से राजधानी निनेवे के निवासियों का संहार तथा नगर का ध्वंश किया गया, वह इस बात का प्रमाण है कि असीरियाई जाति के शत्रुओं में उनके प्रति अपार घृणा थी । अतः वे उनकों नेस्तनाबूद कर उनसे सदियों की बर्बरता का बदला चुकाना चाहते थे। अपनी सदियों की क्रूरता, दुराचार और विजित जाति की स्त्रियों के प्रति दुव्यवहार के द्वारा असीरियाई जाति ने अपने शत्रुओं के मन में उनके संपूर्ण विनाश का संकल्पढ़ कर दिया था, अन्यथा इतने बड़े पैमाने पर नरसंहार और ध्वंस संभव नहीं होता। जिस पैमाने पर असीरियाई सम्राटों ने बेबिलोन और सुसा का विध्वंस किया था, ठीक उसी पैमाने पर उनसे बदला लिया गया । इस विनाश के पश्चात् परोक्ष रूप से असीरियाई सभ्यता का प्रभाव पड़ोसी देशों की सभ्यता में हम पाते हैं। ईरान की सभ्यता तथा जरथुष्ट्र के धर्म में असी रियाई सभ्यता एवं धर्म के प्रभाव वृष्टिगोचर होते हैं। ईरानी साम्राज्य की तड़क भड़क एवं शान शौकत पर असीरियाई साम्राज्य का प्रभाव स्पष्ट है। इस दृष्टि से असीरियाई साम्राज्यवाद एशियाई राजतंत्र का जनक माना जाता है। इसी प्रकार सीरिया की सभ्यता पर बसीरियाई सभ्यता की छाप और भी गहरी तथा सुस्पष्ट है सीरिया के हानि नगर में तो असीरियाई धर्म का मिलता-जुलता रूप अब्बासीद खलीफाओं के शासन काल तक जीवित रहा। बपने विनाश के बावजूद असीरियाई साम्राज्य ने प्राचीन विश्व की सभ्यता में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। बेबिलोन के राजनैतिक और सांस्कृतिक हास के पश्चात् भी बेबिलोनिया की सभ्यता को सुरक्षित रखने का श्रेय असीरियाई सैनिक तंत्र को हो देना। निलेवे के विनाश के पश्चात् उसके विजेताओं ने निनेवे तथा बेबिलोन की सभ्यता को सुरक्षित रखा। अमीरियाई साम्राज्य के पतन के पश्चात् चाल्डिया के शासकों ने इस सभ्यता की रक्षा कर इस कप को जारी रखा।



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