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Blog image DR. RAJESH KUMAR SINGH Shared publicly - May 1 2021 5:13PM

BA PART 3 SEMESTER 5 AMERICAN HISTORY ROOSEVELT


(Theodore Rooselvelt (1901-1909): His Personality 1901 ई. में राष्ट्रपति मैकनिकले अपने प्रतिद्वन्द्वी वायन को हराकर दूसरी बार राष्ट्रपति पद का चुनाव जीता था। परन्तु 6 सितम्बर, 1901 ई. को एक घराजकतावादी ने मैकनिकले को गोली मार दी। उसकी मृत्यु के साथ ही उपराष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट ने राष्ट्रपति पद सम्भाला। ऐसा प्रतीत हुआ कि अराजकतावादी की गोली ने अमेरिका के इतिहास को ही बदल दिया। किन्स एवं कौमेजर के शब्दों में राष्ट्र ने एक महान् उत्साह-प्रेरक तथा शक्ति नेता के दर्शन किए तथा प्रगति धान्दोलन को एक राष्ट्रनायक मिला। वह पूरी तरह लोकतन्त्र परायण था और सुधार कार्यों में उसकी गहरी अभिरुचि थी। इसके साथ ही वह यथार्थवादी राजनीतिज्ञ, उत्साही राष्ट्रवादी तथा निष्ठावान रिपब्लिकन था । जंफरसन को छोड़कर वह अन्य सभी अमेरिकी राष्ट्राध्यक्षों में सर्वाधिक बहुमुखी प्रतिभा वाला राष्ट्राध्यक्ष सिद्ध हुआ । हाँ, उसमें जैफरसन जैसी बौद्धिक गहराई नहीं थी और न ही वैसी सूक्ष्मदर्शिता ।" रियोडोर की घायु 43 वर्ष की थी जब उसने व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति का गौरवशाली पद सम्भाला। इसके पूर्व वह अनेक महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुका था । स्पेन अमेरिकी युद्ध में उसने नौ सेना सचिव के रूप में अपनी कुशाग्र बुद्धि का परिचय देकर सम्पूर्ण राष्ट्र में लोकप्रियता अर्जित की थी। वह बहुमुखी प्रतिभा का घनीं था। 1898 ई. में न्यूयार्क के गवर्नर के रूप में कार्य करके उसने अपने दृढ़ संकल्प और सुधारों के प्रति अपनी जागरूकता का परिचय दिया था । उसके युग को वाशिंगटन में सुन्दर भवन निर्माण के सम्बन्ध में परामर्श देने का युग कहा गया। उसके शासन के दौरान बहुत ही सुन्दर विशाल भवनों का निर्माण हुआ। सारे देश के लोग रूजवेल्ट से प्यार करते थे। उसके प्रत्येक शासकीय कार्य में निर्माण और खिलाड़ी मनोवृत्ति की छाप रहती थी। उसमें बालक का हृदय था, उसको मूल प्रवृत्ति कर्मठ व्यक्ति की थी और उसका मस्तिष्क राष्ट्र निर्माता का था। ग्रह-युद्ध के पश्चात्, वह पहला राष्ट्रपति था जिसने राष्ट्र की समस्याओं का जो विगत तीस वर्षों में उत्पन्न प्रौर विकसित • गहरा अध्ययन किया। उसके पास प्रत्येक समस्या का समाधान और उनसे निबटने की अद्भुत शक्ति थी। उसकी नीतियों में हैमिल्टन के उद्देश्यों की प्रतिध्वनि मिलती थी। जैफरसन के लिए उसके हृदय में स्थान नहीं था, क्योंकि उसकी शासकीय नीतियों की, उसके विरोधियों और बड़े व्यापारियों ने जैफरसन के सिद्धान्तों के आधार पर कड़ी बालोचना की। जैफरसन की भाँति वे भी स्थानीय अधिकारों पर संघीय शासन का अंकुश या आधिपत्य नहीं चाहते थे। थियोडोर, इस समय लोकमत एवं प्रगतिशील प्रान्दोलन को अभिव्यक्ति देना चाहता था। सोमरवेल (Somervell) ने लिखा है: "वर्तमान शताब्दी के प्रारम्भ में राष्ट्रपति रूजवेल्ट तथा जर्मनी का विलियम कैंसर विश्व के दो प्रमुख व्यक्तित्व के धनी थे | "2 वियोडोर रूजवेल्ट ने देश को राष्ट्रीय नेतृत्व दिया और पूँजीवादी शक्तियों के विरुद्ध संघ सरकार की राजनीतिक शक्ति का समर्थन किया। उसके शासनकाल में मुख्य कार्यपालिका की सत्ता और गरिमा बढ़ी। उसका मत था कि राष्ट्र की आवश्यकताओं के अनुसार कुछ भी कार्य करना राष्ट्रपति का अधिकार ही नहीं वरन् परम कर्तव्य है। वह कार्य सम्पन्न करने के बाद देखता था कि उसे ऐसा करने का अधिकार था अथवा नहीं। उसने राष्ट्रीय कार्यक्रमों को नया जीवन दिया। उसके जीवन की पृष्ठभूमि घोर अनुभव विगत राष्ट्रपतियों से भिन्न थे। उसने देश की विरोधी शक्तियों में सन्तुलन की स्थापना का प्रयास किया। वह निर्धनों अथवा सम्पत्तिवानों का नहीं वरन् सत्य का समर्थक था। उसने जो भी कार्य किया वह निडर और स्वतन्त्र होकर किया । थियोडोर रूजवेल्ट को उग्र परिवर्तनवादी नहीं था, बल्कि स्पष्ट विचारों का रूढ़िवादी ही था । वह तत्कालीन अार्थिक व्यवस्था में क्रान्तिकारी परिवर्तन नहीं करना चाहता था, बल्कि उसकी बुराइयाँ दूर करके उसकी रक्षा करना चाहता था । उसने यह सिद्ध करने का निश्चय कर लिया था कि व्यापारियों से सरकार का दर्जा बड़ा है और वह व्यापार का भाट या पिट्ठ नहीं रह सकता। वह जन-साधारण के प्रति न्याय व्यवहार दिए जाने की हिमायत करना चाहता था 13 इंगलंण्ड के सर रॉबर्ट पील की भांति रूजवेल्ट भी दलीय अनुशासन का पालन करता था । परन्तु सामाजिक सुधारों के प्रश्नों पर वह पार्टी के नेताओं से दो हाथ लड़ने को सदैव तैयार रहता था। वह प्रजातन्त्र का कट्टर समर्थक था। लेकिन उसका प्रजातन्त्र बौद्धिक मान्यताओं पर आधारित था न कि किन्हीं निश्चित् रूढ़िवादी सिद्धान्तों पर वह कट्टर राष्ट्रवादी था और अमेरिका को विश्व के महान् राष्ट्रों की पंक्ति में लाने के लिए दृढ़ निश्चयी था। एक वर्ष के भीतर ही उसने दिखा दिया था कि वह मैकनिकले नहीं है, वह प्रगति एवं सुधारों के प्रवाहों को एक अच्छे राष्ट्रपति के समान कार्य रूप देकर शक्ति का प्रयोग कर सम्पूर्ण राष्ट्र को सामाजिक बुराइयों से मुक्त कर एक शक्तिशाली समाज एवं राष्ट्र का निर्माण करना चाहता था। उसने प्रगतिवाद को सम्मानीय स्थान अर्जित करवाया। उसने इस विचार का पुनरुद्धार किया कि जनता के हितों की रक्षा के लिए शासन नैतिक उत्तरदायित्व रखता है। रूजवेल्ट ने यह प्रतिपादित किया कि जंफरसनबाद के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए हेमिल्टनबाद के माध्यम का प्रयोग करना चाहिए । शासन की सक्रिय शक्ति का प्रयोग प्रजातन्त्र के संरक्षण एवं विकास के लिए करना थियोडोर में मित्र बनाने की विशेषता थी। आश्चर्यजनक रूप से कर्मठ एवं क्रियाशील, सदैव प्रफुल्ल एवं उत्साहपूर्ण वह धमेरिकी लोगों के लिए नैतिकता का प्रादर्श बन गया था। परिश्रमी जीवन बिताने का ब्राह्वान उसके व्यक्तिगत जीवन की अभिव्यक्ति थी। समय के साथ रूजवेल्ट प्रतीकात्मक अमेरिकी बन गया और ब्रायन लाफोलेट (Lafolette) या विल्सन से भी अधिक उत्तेजक था | थियोडोर के व्यक्तित्व में नए युग की स्वर्णिम झलक दिखाई देती थी। वह अान्तरिक सुधारों में जहां पोपुलिस्टों घोर ब्रायनवाद से भी अधिक उत्साही था, वहीं अन्तर्राष्ट्रीय रंगमंच पर वह अमेरिका को एक विश्व शक्ति बनाना चाहता था। इन दोनों नीतियों के सफल समन्वय से थियोडोर अमेरिकी जनता की नई उमगों एवं उत्साह का प्रतीक बन गया था।



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